बलवा, हल्ला, हमला करने वाले छात्र तो थे ही नहीं। छात्रों के बीच में घुसे राजनैतिक गुण्डे थे। मक़सद सिर्फ़ एक ही था: दंगे हिंसा बवाल उत्पात मचाकर: अस्थिरता अराजकता गृहयुद्ध की स्थिति निर्मित करना, विदेश से लौटे "शहज़ादे" के इशारे पर।