तथाकथित संभ्रान्त वर्ग को, मन्दिर के बाहर बैठे भिख़ारियों (जिनमें से अधिकांश दुर्भाग्य के मारे होते हैं) से दिक्कत है। लेकिन, मुझे मन्दिर के अन्दर बैठे भिख़ारियों से दिक्कत है। ये दो प्रकार के भिख़ारी हैं। एक वो, जो: सुरक्षा के नाम पर आपका सारा सामान लूट लेते हैं, यहां तक कि पानी की बोतल तक। और फिरSee more...