आप कैलाश विजयवर्गीय जैसा नेता चुनोगे तो आपको ("टन्न") घण्टा ही मिलेगा।
बात दरअसल इतनी सीधी-सरल नहीं है। कैलाश विजयवर्गीय की "घण्टा गिरी" के पीछे, अर्से से दबी पीड़ा-कुण्ठा-हताशा है।
एक ही झटके में: केन्द्रीय राजनीति से बाहर कर दिया जाना और अपने से कहीं अधिक कनिष्ठ मोहन यादव के हाथों के नीचे काम कSee more...